ऐतिहासिक देवकली मंदिर में लगा भक्तों का तांता,गूंजे बम बम भोले के जयकारे।

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औरैया : यूं तो श्रावण मास पर देवालयो मे पूजा अर्चना शुरू हो चुकी है लेकिन औरैया जिले में यमुना नदी के किनारे बीहड़ घाटी में स्थित देवकली मंदिर का नजारा ही कुछ अलग है ।
यह मंदिर औरैया और इसके आस-पास के जिलो में इसलिए चर्चा का विषय रहा है की इस मंदिर पर पहले कई नामी-इनामी डाकु घंटा चढ़ा कर बाबा भोले नाथ से अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए पूजा अर्चना कर चुके है। दस्युओ के समय में कोई भी आम नागरिक वंहा जाने कि सोच भी नहीं सकता था। उस समय इस मंदिर और बीहड़ में सिर्फ और सिर्फ गोलियो कि तड़तड़ाहट कि गूंज सुनायी देती थी लेकिन दस्युओ के समापन के बाद आज औरैया जनपद में सिर्फ हर हर महादेव और बम बम भोले के जयकारे गूंज रहे है। इस मंदिर का प्राचीनतम इतिहास भी इसे विशेष बनाता इसकी एक खास विशेषता है कि हर वर्ष शिवलिंग अपने आप एक जौ के दाने बराबर बढ़ाना है यूपी का औरैया जनपद जो कि बीहड़ के नाम से भी जाना जाता है।इस जनपद कि मुख्य पहचान यंहा की बीहड़ घाटी के साथ ही साथ कुछ दशक पूर्व यंहा के दस्युओ की वजह से भी जाना जाता था , इस जनपद में यमुना नदी के किनारे स्थित बाबा देवकली मंदिर जो कि यंहा का सबसे प्राचीन मंदिर भी है , इस मंदिर कि खूबियाँ तो बता पाना बड़ा ही मुश्किल है लेकिन एक समय ऐसा भी था जब इस मंदिर के दरवाजे भक्तो के लिए तरसते थे क्योकि यंहा सिर्फ और सिर्फ दस्युओ का ही बोलबाला था और उस समय इस मंदिर तक जाना भी भक्तो के लिए मुसीबत था क्योकि दस्युओ कि वजह से यंहा कोई आता नहीं था और इस मंदिर में जयकारो कि जगह सिर्फ गोलियो कि तड़तड़ाहट कि गूंज ही सुनायी देती थी, लेकिन समय बदलने के साथ साथ दस्युओ के ख़त्म हो जाने पर अब इस मंदिर की छटा देखती ही बनती है , इस मंदिर कि मुख्य खासियतो में एक खासियत यह भी है कि इस मंदिर का निर्माण कन्नौज के राजा जयचंद ने अपनी बहन देवकला के नाम इस मंदिर का निर्माण कराया था।यह विश्व का एक मात्र शिव जी का मंदिर है जो कि उनके नाम से नहीं बल्कि किसी स्त्री के नाम से प्रसिद्ध है।इस मंदिर के शिवलिंग कि लम्बाई कई फुट लंबी और चौड़ाई तो आज तक कोई भी नाप नहीं सका है क्योकि बाबा भोलेनाथ को आज तक कोई भी अपनी दोनों हाथों में नहीं ले पाया।इस मंदिर कि ख़ास विशेषता है कि शिवलिंग एक चावल के दाने के बराबर आकार का हर वर्ष बढ़ता है।दस्युओ के उन्मूलन के बाद अब बीहड़ घाटी में बाबा देवकली के जयकारे और शंखनाद ही सुनायी पड़ता है।इस मंदिर में भक्तो का तांता लगता है खास कर महाशिवरात्रि और सावन में तो आस पास के जनपदो जैसे उरई,कानपुर देहात, कानपुर नगर, इटावा, आगरा, कन्नौज तक से हजारों भक्तो की भीड़ दर्शनो के लिए आती है। यह मंदिर लगभग 1500 वर्ष प्राचीन है। वर्तमान समय मे इस प्राचीन मंदिर को अब ट्रस्ट में परिवर्तित कर दिया गया लेकिन इसमें लगने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालने और किसी कानून व्यवस्था के अंतर्गत सुरक्षा के पुख्ता इन्तेजामात किये गए हैं, इस मंदिर की और श्रद्धालुओ की सुरक्षा व्यवस्था हेतु महिला पुलिस समेत सिविल ड्रेस में महिला और पुरुष के जवानों सहित कई थानों का फोर्स भी मौजूद है ।

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