सड़क दुर्घटना में एक युवक की दर्दनाक मौत एक गंभीर रूप से हुआ घायल।

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कानपुर देहात : मंगलपुर कस्बे के डेरापुर रोड पर शराब ठेका के पास रविवार की देर रात अज्ञात वाहन की टक्कर से दो लोग घायल हो गए थे सूचना पर पहुंची पुलिस ने दोनों को इलाज के लिए हवासपुर अस्पताल पहुंचाया था जहां से जिला अस्पताल भेज दिया गया था अस्पताल ले जाते समय कौशल किशोर अवस्थी की रास्ते में मौत हो गई मौत की सूचना पर परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है रविवार की देर रात डिलवल निवासी कौशल किशोर अवस्थी 45 वर्ष मंगलपुर से देर रात एक तेरहवी कार्यक्रम से साइकिल से घर जा रहे थे तभी मंगलपुर चौराहा से कुछ आगे शराब ठेका के पास किसी अज्ञात वाहन की टक्कर लगने से वे गंभीर रूप से घायल हो गए उधर से निकल रहे राहगीरों ने परिजनों को सूचना दी वही एक करीब 20 वर्षीय युवक भी घायल हुआ था जिसकी जेब में पडे आधार कार्ड से हरिओम निवासी नुनारी बुजुर्ग की पहचान की गई थी दोनों की हालत नाजुक थी दोनों को एंबुलेंस से हवासपुर पहुंचाया गया था वहां से जिला अस्पताल रेफर किया गया था रास्ते में कौशल किशोर अवस्थी की मौत हो गई मौत से मां रामवती पत्नी अनीता बदहवास हो गई वही पुत्र अनोखे राजा छोटू सहित सभी परिजनों का रो रो कर बुरा हाल था सूचना पर पहुंचे एस आई रमेश चंद ने शव को कब्जे में लेकर पीएम के लिए भेजा है
मंगलपुर कस्बे में देर रात हुई मार्ग दुर्घटना में घायल हुए दोनों युवक करीब 45 मिनट तक तड़पते रहे वहां कोई चार पहिया वाहन ना होने से दोनों को इलाज के लिए नहीं भेजा जा सका वही ग्रामीणों ने एंबुलेंस को सूचना दी एंबुलेंस को हवासपुर से मंगलपुर पहुंचने में 40 मिनट से ज्यादा का समय लग गया जब तक दोनों की हालत नाजुक होती चली जा रही थी वही लोगों में चर्चा थी की तत्काल सेवा के लिए चलाई जा रही एंबुलेंस भी समय पर काम नहीं आती है समय पर एंबुलेंस पहुंच जाती तो शायद युवक की जान बचाई जा सकती थी घटना के समय में मौजूद लोग एंबुलेंस को कोस रहे थे मंगलपुर मार्ग दुर्घटना में कौशल किशोर अवस्थी की मौत के बाद गांव में सन्नाटा था वही लोग उनकी गरीबी के चलते बच्चों का भरण पोषण होने की चर्चा कर रहे थे वे भूमिहीन होने के चलते गरीबी से जूझ रहे थे किसी तरह से वे अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे थे लेकिन मार्ग दुर्घटना में हुई मौत से परिजनो के सामने पेट भरने की समस्या आ खड़ी हुई है बच्चे अभी इस स्थिति में नहीं है कि वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें गांव में लोग इस मनहूस घड़ी को भी कोस रहे थे

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