एडीजी द्वारा तैयार कराए जा रहे इस एप से कई समस्याओं के हल की उम्मीद।

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एप से पुलिस की रात्रि गश्त की निगरानी की तैयारी

गोरखपुर : रात्रि गश्त में अब पुलिसकर्मी अपने अधिकारियों को गुमराह नहीं कर पाएंगे। वह कब कहां-कहां गए हैं इसका पूरा विवरण उनके मोबाइल से पता कर लिया जाएगा। इसके लिए पुलिसकर्मियों में एक मैम माई वर्क नामक एक एप इंस्टॉल कराने की तैयारी है। इस एप पर एडीजी जोन अखिल कुमार काम शुरू करा दिया है। इस एप के जरिये सिपाही से लेकर थानेदार तक या फिर रात्रि गश्त में जिनकी भी ड्यूटी लगी है उनका पूरा डिटेल पता चल जाएगा।
वायरलेस पर कंट्रोल रूम को अपना लोकेशन बताकर अक्सर पुलिसवाले अपने निर्धारित स्थल या फिर गश्त स्थल से गायब रहते हैं। रात में चोरी सहित ज्यादातर वारदात इसी वजह से सामने आती है। यही कारण है कि गोरखपुर एसएसपी ने पिछले दिनों रात्र गश्त करने वाले पुलिस कर्मियों व अफसरों से व्हाट्सएप पर लाइव लोकेशन भेजने का निर्देश दिया है। एडीजी द्वारा तैयार कराए जा रहे इस एप से इन सभी समस्याओं के हल की उम्मीद है। गश्त पर निकलने पर पुलिस कर्मियों को एक बार एप को ऑन करना होगा उसके बाद वे किस रूट पर गए, कितनी दूरी तय किए और कहां-कहां रुके इन सब का एक मैप बन जाएगा। बाद में पुलिसकर्मी को एप से यह जानकारी निकालकर आला अधिकारियों के पास डे-बाई डे भेजनी होगी।

एडीजी अखिल कुमार ने बताया कि पहले की अपेक्षा तकनीक काफी बढ़ी है। हमें भी अपने काम में तकनीक का सहारा लेकर व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाने की जरूरत है। रात्रि गश्त का प्लॉन बहुत पहले से चल रहा है। इसको लेकर कई नियम कानून भी अलग-अलग समय पर अधिकारियों की ओर से बनाए गए हैं लेकिन फिर भी देखने को मिलता है कि रात्रि गश्त में कुछ पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी से गायब रहते हैं। यही नहीं, वॉयरलेस सेट पर अपना लोकेशन कुछ और बताते हैं और रहते कहीं और हैं। इससे पुलिसिंग व अपराध रोकने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन सब बिन्दुओं को देखते हुए कुछ योजनाओं पर काम किया जा रहा है।

चौबीस घंटे में विश्राम देने का भी प्रयास

वायरलेस लोकेशन के साथ रात 12 बजे से सुबह पांच बजे तक रात्रि गश्त चलती है। अलग-अलग अधिकारियों व थानेदारों का अलग-अलग दिन शेडयूल भी बना है ताकि वे पुलिसकर्मियों की लोकेशन चेक करें साथ ही व्हाटसएप लाइव लोकेशन भेजने की भी व्यवस्था बनाई गई है। अब इसे एप के जरिए जोडऩे का भी प्लान तैयार कराया जा रहा है। पुलिसकर्मी गश्त के बाद एप के जरिए ही अपनी पूरी ड्यूटी का डिटेल संबंधित अधिकारी हो दे सकेंगे। थानेदारों को चौबीस घंटे में एक निश्चित समय का विश्राम देने का भी प्रयास किया जा रहा है। ताकि उन्हें आराम मिल सके और जब वे काम पर आएं तो पूरे मन से ड्यूटी करें। ऐसी व्यवस्था की जाएगी की जब थानेदार के आराम का समय हो तो कोई दूसरा पुलिस अधिकारी गश्त पर रहे और निगरानी करे।

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