किसान मेले का भव्य शुभारंभ मंत्रोच्चारण के साथ हुआ शुभारंभ

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बांदा : कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय मे आयोजित किए जा रहे तीन दिवसीय क्षेत्रीय किसान मेले का कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने फीता काटते हुए पूजा पाठ कर विधि विधान से भव्य शुभारंभ किया । फीता काटकर मेले का शुभारंभ करने के बाद कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने विश्वविद्यालय द्वारा लगाए गए लगभग 150 पंडालों में सरकारों द्वारा कृषि के क्षेत्र में किए जा रहे तमाम कार्यों को गिनाते हुए किस मंत्री ने विश्वविद्यालय के प्रगति पर जोर दिया कृषि मंत्री ने बताया कि सरकार एमएसपी को बढ़ाकर किसानों के उपज का डेढ़ गुना मूल्य देने का काम किया है । बुंदेलखंड के बांदा चित्रकूट मंडल में रवि की फसलों का क्षेत्र बड़ा है बांदा चित्रकूट मंडल में धान के क्षेत्र में भी बढ़ोतरी हुई है । गेहूं की पैदावार भी बड़ी है बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय लगातार किसानों के हित में कार्य कर रहा है यहां से नए-नए उन्नतशील बीज इस क्षेत्र को और भी प्रगति में ले जाने के लिए सहायक होंगे किसान इसका लाभ ले। कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय बांदा में चल रहे किसान प्रदर्शनी में देश के साथ प्रदेशों से आए कृषि वैज्ञानिकों व किसानों के लिए अपने अपने बीज व अन्य चीजें प्रदर्शन के लिए लगाए गए हैं । यहाँ आने वाले किसान सब देखकर और उनसे जानकारी लेकर अपने ज्ञान को बढ़ा पाएंगे तथा इसका लाभ क्षेत्र के लोगों को भी मिलेगा । वैसे तो विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा 150 पंडाल लगाए गए हैं लेकिन किसानों के ना पहुंचने से लगभग एक तिहाई पंडाल खाली पड़े रहे जिन पंडालों में किसान व कृषि वैज्ञानिक अपने उत्पाद के साथ मौजूद थे कृषि मंत्री वहां जरूर रुके और जानकारी ली लेकिन खाली पंडालों को देख मंत्री आगे बढ़ गए । कृषि विश्वविद्यालय में लगे पंडाल पर मंत्री जी की पहुंचने के बाद शुरू कार्यक्रम में प्रमुख अतिथि के रूप में मौजूद कृषि एवं प्रौद्योगिकी मंत्री सूर्य प्रताप शाही मंच से सरकार की खूबियां गिनाते रहे लेकिन उन्हें सुनने के लिए किसान मौजूद नहीं रहे पंडाल में किसानों के बैठने के लिए परी खुशियां खाली पड़ी रही एन आर एल एम की महिलाओं ने विश्वविद्यालय के इस कार्यक्रम की इज्जत बचाने में कुछ हद तक पहुंच कर सहयोग किया लेकिन वह भी कुछ देर बैठने के बाद ही पंडाल से नदारद हो गई मंत्री जी सरकार की खूबियां गिनाते रहे और खाली पड़ी कुर्सियां मंत्री जी को मुंह चिढ़ाती रही । कार्यक्रम में पानी की समुचित व्यवस्था ना होने के कारण किसान पंडाल के बाहर खड़े पानी के टैंकरों में लाइन लगाए पानी पीते नजर आए । पंडाल में किसी भी किसान के लिए पानी के पीने की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी जिससे किसान पंडाल छोड़कर बाहर निकल आए। पिछले 1 महीने से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में 3 दिनो तक चलने वाले किसान मेले के उद्घाटन के लिए पहुंचने की अटकलें आज उद्घाटन के दिन समाप्त हो गई किसान मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम में ना पहुंचने से मायूस दिखाई दिए वैसे तो कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने समय पर पहुंचकर किसानों और यहां आई जनता को संभालने का प्रयास तो किया लेकिन किसान बिना उन्हें सुने पंडाल से नदारद हो गए मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में ना आने पर मुख्य अतिथि के रुप में पहुंचे कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि आज योजना आयोग की दिल्ली में बैठक है जिस में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री जी दिल्ली गए हैं जिसकी वजह से वह कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाए वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री को भी आना था लेकिन वह भी नहीं आए हैं वह कल ऑनलाइन वर्चुअल मीटिंग मौजूद होंगे । किसान प्रदर्शनी मे समूह की महिलाओं द्वारा तैयार किए जा रहे हैं उत्पाद लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं ।लेकिन जिस अंदाज से किसानों के पहुंचने की उम्मीद थी वह किसानों के ना पहुंचने से ना उम्मीदी में बदल गई । ऐसे में इस मेले का कितना लाभ बाँदा व मंडल के किसानों को मिल पाएगा यह तो आगे आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन विश्वविद्यालय द्वारा किए गए तमाम प्रयास किसानों को इकट्ठा करने में नाकामयाब रहे। किसान मेले में कोविड-19 की नियमों की खुली धज्जियां उड़ाई गई खुद विश्वविद्यालय के कुलपति स्वयं मंत्री जी के साथ भ्रमण करते हुए कई जगह मास्क अपनी दाढ़ी पर लगाएं नजर आए वही उनके अधीनस्थ प्रोफेसर जो पंडालों में अपने अपने उत्पाद लगाकर किसानों को जानकारी दे रहे थे वह भी बिना मास्क के नजर आए एक तो पूरे कार्यक्रम में मंत्री सहित जिलाधिकारी आयुक्त चित्रकूट धाम मंडल बांदा व मुख्य विकास अधिकारी सहित मुख्य चिकित्सा अधिकारी सभी कोविड-19 के तहत मास्क लगाए रहे लेकिन खुद कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन कोविड-19 की अनदेखी करते हुए या तो मास्क नहीं लगाए थे और जो लगाए थे वह भी अपने मुंह की जगह दाढ़ी में लगाए नजर आए जब आयोजक ही कोविड-19 के नियमों का सही से अनुपालन नहीं कर रहे थे तो आम लोगों वा आए हुए किसानों से क्या उम्मीद की जा सकती है इस मेले से यकीनन बुंदेलखंड के किसानों का भला हो सकता है लेकिन कहीं किसान मेला कोरोनावायरस बढ़ाने में में मददगार ना साबित हो ।

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