कवियों ने स्थानीय कवि सम्मेलन में बांधा समा

0
701

औरैया : बसन्त पंचमी पर्व पर मंगलवार को दिवियापुर रोड स्थित एक्सिस इंग्लिश मीडियम स्कूल में क्षेत्रीय कवि सम्मेलन कार्यक्रम का आयोजन हुआ जिसमे नगर के तमाम कवि शामिल हुए और अपनी कविताओं को सुनकर लोगों को मंत्रमुग्ध कर कर दिया कार्यक्रम देर शाम तक जारी रहा। कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती की वंदना से हुई।कवि आंनद त्रिपाठी ने माँ सरस्वती को शब्द सुमन अर्पित करते हुए कविता कही।मुहम्मद अतीक ने खामोश क्यूँ है यह गुलो शबनम तेरे बगैर,गमगीन हो गया है यह मौसम तेरे बगैर।। पढ़ी।वरिष्ठ साहित्यकार डॉ अजित द्विवेदी ने ” बहुत हो चुका नख विरख वर्णन,अब ना मैं श्रृंगार लिखूंगा।सीमा रुधिर खौल जाए ऐसा अब अंगार लिखूंगा।। इसके बाद समी खान असर मिफ़्ताही ने व्यंग्य पढ़ा कि यह रंग भी दिखा है अब कि प्यार में, कटियाँ पड़ी हुई हैं कई एक तार में।।कवि सलीम खान धाकड़ ने पढ़ा कि हर शख्स है परेशान, जब से उन्हें बातें बनाना आ गया है।फिर भी वह कह रहे हैं राम का जमाना आ गया है।।शायर रईस बशर ने खामोश हो गया हूँ मैं हारा नहीं सनम, यह सोचकर कि वक़्त हमारा नहीं सनम शेर पढा।शायर अफ़ज़ल खान ने “मेरे पुरखों की जागीरें दबाकर ,वह तस्वीर पुरानी दे गया है” शेर पढ़कर वाहवाही लूटी।कवि अजित पांडे ने कविता पढ़ी:” आंख की अंत दशा काजल ना जाने,मोर के मन का नशा बादल ना जानें,मस्त हो अपनी मधुर झनकार में ही, पाँव कितना है फंसा पायल ना जाने।।इसके बाद हुक्मरान सम्राट ने “चाक दामन रफू करके रखता हूँ मैं” ग़ज़ल पढ़ी।वहीं मुकेश मिश्रा ने “यह कैसी आज़ादी है,यह कैसी आज़ादी है,कहीं मानवता शर्मसार कहीं दागी खाकी है”सबसे बाद में कवि बेंचेलाल कोरी विद्रोही ने वर्तमान किसान आंदोलन पर कविता पढ़ते हुए कटाक्ष किया ” किसानों को बदनाम करने के लिए लालकिले पर चढ़ गए, लगी रही फौज पर धर्म ध्वजा फहरा कर देश को शर्मिंदा कर गए।प्राचीर को आघात पहुंचाने वाले को सजा होनी चाहिए विद्रोही, गृह मंत्री कृषि मंत्री सब सतर्कता विभाग में तैनात गहरी नींद में सो गए”।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि विद्यालय के डायरेक्टर दीपक दीक्षित ने सभी कवियों का स्वागत किया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here